मिडल क्लास को दबाया नहीं, उठाया जाना चाहिए – आदित्य बंसल
देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले मध्यम वर्ग (मिडल क्लास) की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए समाजसेवी आदित्य बंसल ने कहा
देश में यह पहली बार देखने को मिला है कि कॉरपोरेट टैक्स से ज्यादा इंडिविजुअल टैक्स वसूला गया है, यानी बड़े-बड़े कॉरपोरेट घरानों से भी अधिक टैक्स देश के आम नागरिकों और विशेष रूप से मिडल क्लास ने भरा है। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि देश की अर्थव्यवस्था को संभालने में मध्यम वर्ग की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।
आज के समय में सबसे अधिक दबाव यदि किसी वर्ग पर है तो वह मिडल क्लास है। यह वर्ग ईमानदारी से टैक्स देता है, मेहनत करता है और देश की आर्थिक व्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन इसके बावजूद इसकी समस्याओं को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
आदित्य बंसल ने कहा कि मिडल क्लास सिर्फ अपनी जिम्मेदारियां ही नहीं निभाता बल्कि समाज के प्रति भी अपना कर्तव्य निभाता है। देश में हजारों लंगर, कैरिटेबल ट्रस्ट, हॉस्पिटल और स्कूल ऐसे हैं जो इसी वर्ग के लोगों द्वारा चलाए जाते हैं, ताकि देश का कोई भी नागरिक भूखा न सोए, जरूरतमंदों को इलाज मिल सके और हर बच्चे को शिक्षा का अवसर मिल सके।
उन्होंने कहा कि मिडल क्लास अपनी जेब से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और समाज को आगे बढ़ाने के लिए लगातार योगदान देता है, लेकिन इसके बावजूद आज यही वर्ग अपने आपको व्यवस्था के बीच कुचला हुआ और उपेक्षित महसूस करता है।
आदित्य बंसल ने कहा कि आज आवश्यकता है कि देश में ऐसी नीतियां बनाई जाएं जो मध्यम वर्ग को राहत दें। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि देश में व्यवस्था पूरी तरह मेरिट बेस पर होनी चाहिए और हर नागरिक को एक समान शिक्षा तथा एक समान इलाज का अधिकार मिलना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आज भी इस वर्ग की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में मिडल क्लास एक लुप्त होती हुई श्रेणी में बदल सकता है, जो देश के लिए चिंता का विषय होगा।
बंसल ने कहा कि यदि देश के मिडल क्लास को मजबूत किया जाएगा तो देश अपने आप मजबूत होगा, इसलिए समय आ गया है कि नीति निर्माण में इस वर्ग की आवाज को गंभीरता से सुना जाए और इसके हितों के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

